Pariwaar Tutne ki Aham Wajah/परिवार टूटने की अहम वजह(Hindi/Urdu)

"आज के दौर में रिश्ते बहुत नाज़ुक हो गए हैं। एक छोटी सी बात, एक छोटी सी गलतफहमी, और पूरी की पूरी दीवार खड़ी हो जाती है। खासकर जब एक नया रिश्ता — एक नई बहू — घर में आती है तो अक्सर पुराने रिश्ते कमज़ोर होने लगते हैं।

Pariwaar Tutne ki Aham Wajah/परिवार टूटने की अहम वजह

Pariwaar Tutne ki Aham Wajah

Pariwaar Tutne ki Aham Wajah



आज के दौर में रिश्ते बहुत नाज़ुक हो गए हैं। एक छोटी सी बात, एक छोटी सी गलतफहमी, और पूरी की पूरी दीवार खड़ी हो जाती है। खासकर जब एक नया रिश्ता — एक नई बहू — घर में आती है तो अक्सर पुराने रिश्ते कमज़ोर होने लगते हैं।

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    आज के समय में परिवार टूटने की सबसे बड़ी वजहों में से एक वजह है – मां बाप या सास ससुर का बेटे या बहु से मुतल्लिक दो नज़रिए रखना और नई नवेली बहु का अपने रिश्तों को अहमियत देना और ससुराल के रिश्तों को अहमियत न देना। और दूसरी ख़ास वजह 
    किसी की बात को सुन कर बिना सोचे समझे जल्दबाज़ी, जज़्बात और गलतफहमी में फैसला करना। इस लेख Pariwaar Tutne ki Aham Wajah में हम पढ़ेंगे की क्या वाकई इसकी वजह वो भाभी , नई नवेली दुल्हन है या खुद घर वाले। 


    एक औरत अपने मां बाप और भाई बहन के रिश्तों को जिस तरह अहमियत देती है वैसे ही अगर अपने ससुराल के रिश्तों को अहमियत दे तो वो घर जन्नत बन सकता है।

    👳 भाई : एक अनमोल रिश्ता


    भाई वो रिश्ता है जो माँ-बाप के बाद आपके सबसे करीब होता है। जो आपके साथ हर मोड़ पर खड़ा होता है — चाहे वो बचपन के झगड़े हों, जवानी की जिम्मेदारियाँ हों या बुढ़ापे का सहारा। चाहे हालात जैसे भी हों, अगर पूरी दुनिया साथ छोड़ दे तो भाई ही वो शख्स होता है जो आपके साथ खड़ा होता है। और यह तब होता है जब रिश्तों में दिखावे, झूट और फ़रेब न हो बल्कि ख़ालिश सच्ची मोहब्बत हो। 

    लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि आजकल अक्सर घरों की कहानी है की अपनों से बड़ा कोई दुश्मन नहीं। भाई ही भाई के खिलाफ खड़ा हो जाता है —अपना ही अपना दुश्मन बन जाता है। अक्सर हक बोलने वाले के ख़िलाफ़ अपने ही खड़े हो जाते हैं। उसके साथ झूट और धोका से काम लेते हैं। और इसकी वजह बनती है गलतफहमियाँ, अहंकार, और दूसरे के बहकावे में लिए गए ग़लत फैसले, ज़मीन और जायदाद की लालच। 


    🧕 बीवी का हक़ है, लेकिन हद में

    बीवी का स्थान इस्लाम और समाज दोनों में बहुत ऊँचा है — वह घर की रानी होती है, मोहब्बत और सुकून का ज़रिया होती है।
    मगर यह बात भी समझनी चाहिए कि बीवी का मतलब यह नहीं कि वह भाईयों और मां बाप के रिश्तों के बीच दीवार बन जाए।
    एक अक़्लमंद बीवी परिवार को जोड़ती है, भाईयों के बीच पुल बनती है, बुज़ुर्गों की इज्ज़त करती है और हर बात को सुलह से सुलझाती है।
    जबकि एक ज़रा सी बात पर भावनाओं में बहकर भाई को भाई से अलग करने वाली औरत घर नहीं बसाती, बल्कि उसे धीरे-धीरे जला देती है। 
    एक बीवी ही होती है जो चाहे तो घर को जन्नत बना दे या जहन्नुम। रिश्तों को समेट ले या बिखेर दे। 

    👬भाईयों या मां बाप की रिश्ते में दीवार क्यों?


    अक्सर देखा जाता है कि जब तक भाई बहन छोटे रहते हैं उनमें बेहद मोहब्बत रहती है एक दूसरे से। वे एक दूसरे का ख़्याल रखते हैं एक दूसरे की फ़िक्र करते हैं,एक दूसरे की ढाल, एक दूसरे की मुस्कान, खेल के साथी, लड़ाई के बाद भी मिनटों में मान जाने वाले। बचपन के ये रिश्ते इतने सच्चे और मासूम होते हैं कि उनमें कोई शक, कोई स्वार्थ नहीं होता।
    लेकिन जैसे ही भाई की ज़िन्दगी में उसकी जीवन साथी आती है, वही भाई जो जान से प्यारा था, अजनबी लगने लगता है।वही मां बाप जो हमें बेहद प्यारे थे अब हमे उनकी बातें अच्छी नहीं लगती। ऐसा क्यों? क्या वाकई Pariwaar Tutne ki Aham Wajah सिर्फ़ नई बहू है?

    नहीं! कई बार यह दीवार हमारी जल्दबाज़ी, जज़्बात और अधूरी समझ का नतीजा होती है। हम बात पूरी सुने बिना फैसला कर लेते हैं, और अपनों से दूर हो जाते हैं।

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    💔 शादी के बाद भाईयों के रिश्ते क्यों बदलते हैं?

    शादी के बाद इंसान के ऊपर घर और एक नई ज़िन्दगी की ज़िम्मेदारियाँ आती हैं और वह अपने घर-परिवार को संभालने की दौड़ में लग जाता है। हर इंसान चाहता है कि अब उसकी बीवी भी इज़्ज़त पाए, वो भी परिवार में अपनी जगह बनाए।
     मगर हम भूल जाते हैं कि जैसे माँ का दिल बाँट कर भी छोटा नहीं होता, वैसे भाई की मोहब्बत भी बाँटने से घटती नहीं — बस ज़रूरत है दिल बड़ा करने की और हर मां बाप या बीवी को ये बात अच्छी तरह से समझना चाहिए। 

    अक्सर ये देखा जाता है की कभी हम मां बाप या भाई बहन की बातों में आकर बीवी से ताल्लुक़ खराब करते हैं तो कभी बीवी की बातों में आकर अपनों से रिश्ते खराब करते हैं। और इसका जिम्मेदार हम खुद हैं की किसी की बातों को बिना पूरा सुने और समझे कोई फ़ैसला कर बैठते हैं।
    Note:
    शादी के बाद एक लड़की कच्चे बांस की तरह होती है हम जैसा चाहे उसे बना सकते हैं। घर में आई नई बहू को हम जैसा माहौल देंगे उसी माहौल में वो ढलेगी उसी माहौल को अपनाएगी भले ही थोड़ वक्त लगे। ये हमारी जिम्मेदारी है कि हम कैसा माहौल दे रहे हैं। घर वाले उसे इज़्ज़त देंगे तो वो भी इज़्ज़त देगी और अगर न क़दरी करेंगें तो वो भी ना क़दरी करेगी। 

    🧱 🌿 रिश्तों की नींव कब हिलती है या दीवार कब खड़ी होती है?

    जब हम बड़े होते हैं, वक़्त बदलता है, ज़िम्मेदारियाँ बढ़ती हैं, और घर में एक नई बहू (भाभी) आती है, वही दो भाई जो कभी एक-दूसरे की जान हुआ करते थे, अजनबी से नज़र आने लगते हैं। यहां तक कि मां बाप की मोहब्बत में भी कमी आने लगती है,आपसी मोहब्बत धीरे धीरे ख़त्म होने लगती है और मोहब्बत की जगह दिल में कड़वाहट बढ़ने लगती है। यह सिर्फ़ एक रिस्ता नहीं टूटता, पूरा खानदान बिखरता है।
    आख़िर क्या वजह है इसकी? कौन है इसका ज़िम्मेदार? क्या वो औरत जो हमारे घर में आती है या खुद हम? ये एक बहुत बड़ा सवाल है।

    असल दीवार ‘औरत’ नहीं होती, दीवार होती है "गलतफहमी, अहंकार, शक और जज़्बात में लिए गए फैसले"।
    जब हम किसी की बात बिना सोचे समझे मान लेते हैं, अपनों की बात सुने बिना ही उनसे दूर हो जाते हैं — तब रिश्ते👪 टूटते हैं।
    हम छोटे थे तो दिल साफ़ था, अब अहंकार, शक, दुनिया की बातें और ‘मर्दाना ग़ुरूर’ बीच में आ जाते हैं। कई बार औरतें भी अनजाने में ऐसी बातें कर देती हैं जिससे भाईयों के बीच फ़ासले बढ़ते हैं। मगर सबसे बड़ा ज़िम्मेदार खुद ‘हम’ होते हैं — हमारा ग़ुरूर, हमारी जल्दी बुरा मानने की आदत और दिल का तंग हो जाना।

    क्या यह अक्लमंदी है कि हम बस अपनी बीवी की बात सुने और बगैर सोचे समझे उसकी बातों में आकर सामने वाले की बात सुने बगैर उसके के खिलाफ खड़े हो जाते हैं, माना कि सारी गलती घर वालों की है लेकिन बीवी भी तो गलत हो सकती है। न हम पूरी बात समझते हैं और न ही समझाने की कभी कोशिश करते हैं बस रिश्ते तोड़ लिए। 

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    जो लोग बेवजह, ग़ुस्से, अहंकार या दुनियावी फायदे के लिए रिश्ते तोड़ते हैं, उनके बारे में इस आयत में कड़ी चेतावनी दी गई है। आगे की आयतों में अल्लाह ने फ़रमाया है कि ऐसे लोग दुनिया और आख़िरत दोनों में नुकसान उठाएँगे।

    👩 क्या सच में सिर्फ़ औरत ज़िम्मेदार है?

    ये कहना आसान है कि भाईयों के रिश्ते नई बहू की वजह से बिगड़ गए। लेकिन क्या हर औरत बुरी होती है? बिल्कुल नहीं!

    कुछ बहुएं घर जोड़ने आती हैं, लेकिन उन्हें नज़रअंदाज़ किया जाता है। दूसरी तरफ़ कुछ ऐसी भी होती हैं जो अपने मतलब के लिए परिवार तोड़ देती हैं। ऐसे में सवाल उठता है — गलती सिर्फ़ एक की है या सबकी?
    ये जरूरी नहीं की हर नई आने वाली औरत ही ऐसी हो जो रिश्तों में दरार डाले। कुछ नेक और अच्छी भी होती हैं जो ससुराल के हर रिश्तों को संभाल कर , सिमट कर रखना चाहती हैं लेकिन ऐसी औरतों की कोई क़दर नही होती और न ही कोई साथ देता है। बल्कि उसी के साथ ग़लत सलूक किया जाता है यहां तक के ज़ुल्म की शिकार भी हो जाती है।अक्सर यह देखा जाता है कि अगर कोई सुलझी और क़ाबिल ए इज़्ज़त लड़की है तो उसकी बेक़द्री की जाती है। उसे सताया जाता है। 
    नही तो आज कल अक्सरियत ऐसी हैं जो परिवार को सिमट कर रखने के बजाए अलग रहना चाहती हैं और रिश्तों को खराब करती हैं वो रिश्ते चाहे भाई भाई के हों या मां बाप के। इन रिश्तों को छोड़ कर अपनी एक अलग दुनिया बसाना चाहती है।और ऐसा करने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकती हैं। शौहर को मां बाप और भाई बहन के खिलाफ भड़कती रहती हैं। अगर शौहर समझदार हुआ तो ठीक नहीं तो एक दिन वो भी अपनी बीवी के बहकावे में आकर अपनों से अलग हो जाता है। 

    📝 Note: 

    यहां एक गौर करने वाली बात है कि ऐसी औरतें जो शौहर को उसके परिवार से अलग कर रही है, उन रिश्तों को शौहर से छुड़ा कर अलग रहना चाहती हैं उनसे एक सवाल है कि वो ऐसा करने के बाद अपने रिश्तों यानी मां बाप,भाई बहन के रिश्तों के साथ क्यूँ ताल्लुक़ रखती हैं उन्हें भी छोड़ दे। तब होगी इंसाफ़ की बात। वो ऐसा क्यों नहीं करती?


    जिस तरह मां बाप बेटी और दामाद के प्यार को प्यार समझते है उसी तरह बहु और बेटे के प्यार को भी प्यार समझें,बहु की ग़ुलामी नहीं तो रिश्ते , मज़बूत होंगे।

    शादी के बाद दो नज़रिया क्यूँ :

    जिस तरह मां बाप अपनी बेटी को प्यार मोहब्बत से रखते हैं उसी तरह अपनी बहु को भी बेटी समझें तो ये सब दिन देखने को न मिलेगा,रिश्ते खराब नहीं होंगे। और इसी तरह एक बहु अपने मां बाप को जैसे चाहती और इज़्ज़त देती हैं वही इज़्ज़त अपने सास ससुर को दे तो रिश्ते मज़बूत होंगे,रिश्तों में बरकत और खुशहाली आएगी।

    और सबसे अहम और बड़ी बात कि जब मां बाप अपनी बेटी को देखते हैं की उसका शौहर उसे बहुत चाहता है ,हर वक़्त उसका खयाल रखता है और हर काम में उसकी मदद करता है,उसे हर महीने खर्च भी दे रहा है तो मां बाप बहुत खुश होते है कि मेरा दामाद कितना अच्छा है तारीफ़ के पुल बांधते नहीं सकते। 

    लेकिन अगर यही मुआमला बेटा अगर बहु यानी अपनी बीवी के साथ कर रहा है तो बेटा की यह हरकत मां बाप को पसंद नहीं,बेटा बीवी का गुलाम बन गया,लगता है बहु ने कुछ खिला कर बेटा को अपने बस में कर ली है। ये सोच है आज कल मां बाप की और Pariwaar Tutne ki Aham Wajah यही होती है। हर मां बाप को इस पर गौर करने और दो नजरिया से बचने की जरूरत है। 

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    मर्द बीच मंझदार में:

    शादी के बाद अक्सर मर्दों की ज़िन्दगी परेशानी और तनाओ में गुजरती है। बहुत कम खुश नसीब हैं जो सकून से जी पाते हैं। जब भी मर्द बाहर से कमाकर घर में आया एक तरफ या तो बीवी घर वालों के खिलाफ कान में कुछ डालती रहती है या तो मां बाप बहु के खिलाफ बेटे के कान भरते रहते हैं। 
    अच्छी अख़्लाक़ की बीवियां कभी भी अपने शौहर को शिकवे शिक़ायत से दूर रखती हैं,वो सब्र करती हैं और शौहर को दिमाग़ी तनाव से बचती हैं ताकि दोनों खुश रहें अक्सर इसके उलट होती हैं वो खुद भी तनाव में रहती हैं और शौहर को भी दिमाग़ी तनाव देती हैं। 
    और मां बाप को भी चाहिए कि छोटी छोटी गलतियों को नज़र अंदाज करें। अगर बहु बेटे से ग़लती हो तो समझाएं न कि शिकवे शिक़ायत करना शुरू कर दें। 
    अब मर्द बेचारा क्या करे? कमाए और घर परिवार चलाए या इनकी बातें सुने बस इसी बीच मंझदार में पड़ कर मर्द कभी कभी गलत फैसला कर बैठता है हालांकि गलती किसी और की होती है। और यही Pariwaar Tutne ki Aham Wajah बन जाता है। 

    💬 सोचिए और पूछिए खुद से:

    🔹क्या बेटी के लिए दामाद का प्यार , प्यार है और बहु के लिए बेटे का प्यार गुलामी?
    🔹क्या बीवी के लिए अपने रिश्ते ,रिश्ते हैं और ससुराल के रिश्तों की नकदरी करनी चाहिए। 
    🔹 क्या एक छोटी सी शिकायत पर पूरी उम्र का रिश्ता तोड़ना समझदारी है?
    🔹 क्या हर बात को बिना जाँचे मान लेना इंसाफ़ है?
    🔹 क्या हक़ बोलने वाले और नरमी से पेश आने वालों को दबाना और उनके नर्म मिजाजी को मजबूरी समझना सही है?

    वक़्ती बातों पर रिश्ते कुर्बान न करें

    हर रिश्ते को दिल से अपनाएं, दिल से चाहें,दिखावे का प्यार न करें।
    हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं, पर समझदारी इसी में है कि ग़लतफहमी को बढ़ाने की जगह बैठकर बात की जाए, सुलह की जाए, और रिश्तों को तवज्जो दी जाए।
    क्योंकि वक़्ती गुस्से में की गई दुश्मनी सिर्फ़ पछतावे को जन्म देती है।


    📖 शरीअत का हुक्म

    "और रिश्तों को मत तोड़ो जिनको जोड़ने का हुक्म अल्लाह ने दिया है…"
    📚 (क़ुरान 13:25)

    "जो अपने भाई से तीन दिन से ज़्यादा नाराज़ रहे और बात ना करे, वह जुल्म करता है…"
    📚 (सहीह मुस्लिम)

    इस आयत में अल्लाह तआला ने एक बहुत अहम सामाजिक और धार्मिक उसूल बयान किया है:
    रिश्तों को जोड़ना अल्लाह का हुक्म है, और उन्हें तोड़ना नाफ़रमानी (गुनाह) है।
    जो रिश्तों को तोड़ने की कोशिश करते हैं वो अल्लाह की नाफरमानी करते है,अल्लाह के हुक्म के ख़िलाफ़ जाते हैं।

    "जो रिश्ता अल्लाह के लिए निभाया जाए, उसमें बरकत उतरती है — और जो रिश्ते नफ़्स और ग़ुरूर के लिए तोड़े जाएं, वो जहालत का सबब बनते हैं।"

    🧩 परिवार टूटने की कुछ अन्य अहम वजहें

    1. अहम और ज़िद

    घर के हर सदस्य का "मैं सही हूं" का रवैया बहुत से रिश्तों में दरार पैदा करता है। हर किसी को अपनी बात मनवानी है, लेकिन सुनने और समझने वाला कोई नहीं होता।

    2. सच बोलने वाले को दबाना

    अक्सर ये देखा जाता है कि कम और सच बोलने वाले, नर्म लहजे वाले को दबाया जाता है। उसके झुकाओ को उसकी कमज़ोरी और मजबूरी समझा जाता है। और ऐसे शख्स के खिलाफ अपने ही खड़े होते हैं। 

    3. बात-बात पर बड़ों की तौहीन

    बुज़ुर्गों की बातों को "पुराने ज़माने की सोच" कहकर नकार देना आम हो गया है। जब बुज़ुर्गों का सम्मान घर से उठ जाता है, तो बरकत भी उठ जाती है।

    4. घर की बात बाहर और बाहर की बात घर के अंदर

    अक्सर देखा गया है कि रिश्तेदार, पड़ोसी या सोशल मीडिया पर चर्चा करते हुए घर की बातें बाहर चली जाती हैं — और बाहरी राय अंदर घुसकर रिश्तों को बिगाड़ देती है।

    5. माली मसले (पैसे का झगड़ा)

    भाई-भाई में ज़मीन-जायदाद, पैतृक संपत्ति या आमदनी को लेकर झगड़े आम होते जा रहे हैं।
    जब रिश्ते पैसों से भारी हो जाएं, तो दिल हल्के पड़ जाते हैं। जब रिश्तों से ज़्यादा अहमियत दौलत की हो जाए तो रिश्ते दीवार बन जाते हैं। 

    6. ग़लत मशविरा (भड़काने वाले लोग)

    कुछ लोग दूसरों के घर को जलते हुए देख कर खुश होते हैं।अगर समझदारी न हो तो हम ऐसे लोगों के बहकावे में आकर अपनों से ही दूर हो जाते हैं।

    7. कमीनीकेशन गैप (बात न करना)

    एक छोटी सी नाराज़गी समय के साथ बड़ी दीवार बन जाती है जब तक बात नहीं होती। शक, बदगुमानी और दूरी सिर्फ़ उसी रिश्ते में बढ़ती है जिसमें संवाद कम हो जाए।

    8. नरम मिजाज़ी की कमीन

    हर घर में एक ऐसा शख्स होना ज़रूरी है जो नर्मी से सुलह कराए, दिलों को जोड़े — लेकिन जब सब एक जैसे गरम मिजाज़ हो जाएं, तो रिश्ते जल जाते हैं।घर तबाह हो जाते हैं। और नरम मिजाज़ वाले भी भला कब तक नरमी दिखाएं। उसकी नर्मी को कमज़ोरी समझा जाता है। 

    किसी ने क्या ख़ूब कहा है:

    झुकने से रिश्ते गहरे होते हैं तो झुक जाओ
    मगर बार बार आप ही को झुकना पड़े तो रुक जाओ
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    ✅ Conclusion:


    रिश्ते खून से बनते हैं, लेकिन समझदारी से बचाए जाते हैं।
    हर औरत बुरी नहीं होती, और हर बात सही भी नहीं होती। जो बुरी हैं उन्हें प्यार से समझाएं,रिश्तों की अहमियत बताएं।
    अपनी ज़िन्दगी को संतुलन से चलाना सीखिए — बीवी की बात सुनिए, पर भाई का दिल भी समझिए।
    एक सच्चा मुसलमान और समझदार इंसान वही है, जो अपने घर को जोड़ता है, तोड़ता नहीं।

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    📌 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: क्या बीवी की हर शिकायत पर भाई से दूरी बनाना जायज़ है?
    👉 नहीं, इस्लाम में बिना तस्दीक के किसी पर इल्ज़ाम लगाना मना है। पहले हक़ीक़त जानें, फिर फैसला करें।
    Q2: क्या हर बीवी या भाभी बुरी होती है ?
    👉 नहीं हर बीवी या भाभी बुरी नहीं होती है। कुछ बुरी होती हैं और कुछ अच्छी भी। लेकिन यह भी हक़ीक़त है कि जो अच्छी होती हैं अक्सर उनकी क़दर नहीं होती है। 
    Q3: अगर बीवी लगातार भाई के खिलाफ भड़काए?
    👉 ऐसे में नर्मी से समझाइए कि रिश्ते बनाए रखना जरूरी है। जरूरत पड़े तो बुज़ुर्गों की मदद लें।
    Q4: क्या भाई-भाई में दूरियाँ सिर्फ़ बहू की वजह से आती हैं?
    👉 नहीं, असली वजह सिर्फ़ बहू नहीं होती। शक, अहंकार, जल्दी बुरा मानना और दिल का तंग हो जाना भी बड़ी वजहें हैं। 
    Q5: शादी के बाद भाईयों का रिश्ता कैसे बचा सकते हैं? 
    👉खुलकर बात करें, पुरानी यादें ताज़ा करें, दिल बड़ा रखें और एक दूसरे पर भरोसा बनाए रखें। 
    Q6: बीवी का क्या रोल होता है?
    👉 समझदार बीवी हमेशा रिश्ते जोड़ती है, भाईयों को करीब लाने की कोशिश करती है और घर में प्यार की फ़ज़ा बनाए रखती है। 
    Q7: क्या रिश्तों में बचपन वाला प्यार वापस आ सकता है?
    👉जी हाँ, अगर हम दिल से चाहें, तो मोहब्बत वापस ला सकते हैं — सिर्फ़ नीयत और कोशिश की ज़रूरत है।
    Q8: अगर भाई ने बीवी से कुछ ग़लत कहा हो तो?
    👉 बातचीत से मामला सुलझाइए, सुलह की कोशिश कीजिए। दोनों तरफ सुनिए, न कि सिर्फ़ एक पक्ष की।

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    इस लेख को पढ़ कर कैसा लगा अपनी राय ज़रूर comment box में लिखें। 

    آج کے دور میں رشتے اور خاندان ٹوٹنے کی اہم وجوہات

    آج کے دور میں رشتے بہت نازک ہو گئے ہیں۔ ایک چھوٹی سی بات، ایک چھوٹی سی غلط فہمی، اور پوری کی پوری دیوار کھڑی ہو جاتی ہے۔ خاص طور پر جب ایک نیا رشتہ — ایک نئی بہو — گھر میں آتی ہے تو اکثر پرانے رشتے کمزور ہونے لگتے ہیں۔

    آج کے زمانے میں خاندان ٹوٹنے کی سب سے بڑی وجوہات میں سے ایک وجہ ہے: ماں باپ یا ساس سسر کا بیٹے یا بہو سے متعلق دو الگ نظریے رکھنا اور نئی نویلی بہو کا اپنے میکے کے رشتوں کو اہمیت دینا لیکن سسرال کے رشتوں کو اہمیت نہ دینا۔ اور دوسری بڑی وجہ یہ ہے کہ کسی کی بات سن کر بغیر سوچے سمجھے، جلدبازی، جذبات اور غلط فہمی میں فیصلہ کر لینا۔

    اس مضمون "Pariwar Tutne ki Aham Wajah" میں ہم پڑھیں گے کہ کیا واقعی اس کی وجہ وہ بھابی یا نئی نویلی دلہن ہے یا خود گھر والے؟


    👳 بھائی: ایک انمول رشتہ

    بھائی وہ رشتہ ہے جو ماں باپ کے بعد سب سے قریب ہوتا ہے۔ جو ہر موڑ پر ساتھ کھڑا ہوتا ہے — چاہے بچپن کے جھگڑے ہوں، جوانی کی ذمہ داریاں ہوں یا بڑھاپے کا سہارا۔ مگر افسوس آج کل یہی بھائی ایک دوسرے کے مخالف کھڑے ہو جاتے ہیں۔ اس کی وجہ بنتی ہے:

    • غلط فہمیاں

    • انا

    • دوسروں کے بہکاوے میں آنا

    • زمین و جائیداد کی لالچ


    🧕 بیوی کا حق ہے، لیکن حد میں

    بیوی کا مقام اسلام اور معاشرے میں بہت بلند ہے۔ وہ گھر کی رانی ہے، سکون اور محبت کا ذریعہ ہے۔ لیکن بیوی کا مطلب یہ نہیں کہ وہ بھائیوں اور ماں باپ کے درمیان دیوار بن جائے۔ ایک عقل مند بیوی خاندان کو جوڑتی ہے، بڑوں کی عزت کرتی ہے اور بھائیوں کے درمیان پل کا کردار ادا کرتی ہے۔ لیکن جو بیوی بھائی کو بھائی سے الگ کرے وہ گھر نہیں بساتے بلکہ گھر کو جلا دیتی ہے۔


    👬 بھائیوں یا ماں باپ کے رشتے میں دیوار کیوں؟

    بچپن کے رشتے بہت سچے اور بے غرض ہوتے ہیں۔ لیکن جیسے ہی شادی ہوتی ہے اور نئی بہو گھر آتی ہے تو اکثر دل بدل جاتے ہیں۔ وہی بھائی جو جان سے پیارا تھا، اجنبی لگنے لگتا ہے۔ وہی ماں باپ جنہیں سب سے عزیز سمجھا جاتا تھا، ان کی باتیں بری لگنے لگتی ہیں۔

    اصل دیوار بہو نہیں بلکہ "غلط فہمی، انا، شک اور جذبات میں لیے گئے فیصلے" ہوتے ہیں۔


    💔 شادی کے بعد بھائیوں کے رشتے کیوں بدلتے ہیں؟

    شادی کے بعد نئی ذمہ داریاں آتی ہیں۔ ہر شخص چاہتا ہے کہ اس کی بیوی کو عزت ملے۔ لیکن یہ بھول جاتے ہیں کہ محبت بانٹنے سے کم نہیں ہوتی۔ اصل ضرورت ہے "دل بڑا کرنے" کی۔

    اکثر دیکھا گیا ہے کہ کبھی ماں باپ کی باتوں میں آکر بیوی سے تعلق خراب کیا جاتا ہے، اور کبھی بیوی کی باتوں میں آکر اپنوں سے رشتے خراب کیے جاتے ہیں۔ اور اس کا ذمہ دار ہم خود ہوتے ہیں کہ ہم بغیر پوری بات سمجھے فیصلہ کر لیتے ہیں۔


    🧱 رشتوں کی دیوار کب کھڑی ہوتی ہے؟

    جب ہم بڑے ہوتے ہیں، وقت بدلتا ہے، نئی بہو آتی ہے تو آہستہ آہستہ بھائی بھائی میں، ماں باپ اور اولاد میں محبت کم ہونے لگتی ہے اور دل میں کڑواہٹ بڑھنے لگتی ہے۔ نتیجہ یہ نکلتا ہے کہ صرف ایک رشتہ نہیں ٹوٹتا بلکہ پورا خاندان بکھر جاتا ہے۔


    👩 کیا صرف عورت ذمہ دار ہے؟

    یہ کہنا کہ خاندان صرف بہو کی وجہ سے ٹوٹتا ہے درست نہیں۔ ہر عورت بری نہیں ہوتی۔ کچھ بہوئیں گھر جوڑنے آتی ہیں لیکن انہیں نظرانداز کر دیا جاتا ہے۔ اور کچھ واقعی ایسی بھی ہوتی ہیں جو خودغرضی میں خاندان کو توڑ دیتی ہیں۔ اصل حقیقت یہ ہے کہ قصور اکثر سب کا ہوتا ہے — کبھی شوہر کا، کبھی والدین کا اور کبھی بہو کا۔


    📝 نوٹ

    اگر کوئی عورت شوہر کو اس کے ماں باپ سے الگ کر رہی ہے تو سوال یہ ہے کہ کیا وہ اپنے ماں باپ اور بھائی بہن کے رشتوں کو بھی چھوڑ دیتی ہے؟ نہیں! پھر انصاف کہاں ہے؟


    📖 شریعت کا حکم

    "اور رشتوں کو مت توڑو جنہیں جوڑنے کا حکم اللہ نے دیا ہے…"
    📚 (القرآن 13:25)

    "جو اپنے بھائی سے تین دن سے زیادہ ناراض رہے اور بات نہ کرے، وہ ظلم کرتا ہے…"
    📚 (صحیح مسلم)


    🧩 خاندان ٹوٹنے کی دیگر اہم وجوہات

    1. انا اور ضد

    2. سچ بولنے والے کو دبانا

    3. بڑوں کی توہین

    4. گھر کی بات باہر لے جانا

    5. مالی مسائل (زمین، جائیداد)

    6. غلط مشورہ دینے والے لوگ

    7. بات چیت کا نہ ہونا

    8. نرمی کی کمی


    ✅ نتیجہ (Conclusion)

    رشتے خون سے بنتے ہیں لیکن عقل و سمجھ سے بچائے جاتے ہیں۔ ہر عورت بری نہیں ہوتی اور نہ ہی ہر فیصلہ صحیح ہوتا ہے۔ اصل مسلمان وہ ہے جو رشتے جوڑے، نہ کہ توڑے۔


    مصنف: محب طاہری
    🕋 اسلامی بلاگر


    📌 اکثر پوچھے جانے والے سوالات (FAQs)

    Q1: کیا بیوی کی ہر شکایت پر بھائی سے دوری بنانا جائز ہے؟
    👉 نہیں، پہلے حقیقت جاننا ضروری ہے۔

    Q2: کیا ہر بیوی یا بھابی بری ہوتی ہے؟
    👉 نہیں، کچھ بری ہوتی ہیں اور کچھ اچھی بھی۔

    Q3: اگر بیوی بھائی کے خلاف بھڑکائے؟
    👉 نرمی سے سمجھائیں، ضرورت پڑے تو بزرگوں کو بیچ میں لائیں۔

    Q4: کیا بھائی بھائی میں دوریاں صرف بہو کی وجہ سے آتی ہیں؟
    👉 نہیں، اصل وجہ شک، انا اور جلدی بُرا ماننا بھی ہوتا ہے۔

    Q5: شادی کے بعد بھائیوں کا رشتہ کیسے بچایا جا سکتا ہے؟
    👉 کھل کر بات کریں، پرانی یادیں تازہ کریں اور دل بڑا رکھیں۔

    Q6: بیوی کا کیا کردار ہے؟
    👉 سمجھدار بیوی ہمیشہ رشتے جوڑتی ہے اور گھر میں محبت قائم رکھتی ہے۔

    Q7: کیا بچپن والا پیار واپس آ سکتا ہے؟
    👉 جی ہاں، اگر نیت اور کوشش ہو تو سب ممکن ہے۔

    Q8: اگر بھائی نے بیوی سے کچھ غلط کہا ہو تو؟
    👉 دونوں کی بات سن کر صلح کی کوشش کریں۔


    کسی نے کیا خوب کہا ہے:
    جھکنے سے رشتے گہرے ہوتے ہیں تو جھک جاؤ
    مگر بار بار آپ ہی کو جھکنا پڑے تو رک جاؤ

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