Baap ka Wajood —Ek Chhaon Jaisi Moujudgi, Jiski jagah koi nahi le sakta
बाप: एक छांव जैसा वजूद
बाप : एक अदृश्य परछाई
बाप का प्रेम: बिना शोर का समंदर
बाप की जगह कोई नहीं ले सकता
मैंने "माँ" की बहुवचन देखी — "माएँ" मिलीं,फिर "पिता" की बहुवचन ढूंढने निकला कुछ न मिला।"पापा", "अब्बा", "बाबा", "डैड" जैसे सारे शब्द याद किए,
पर इनमें कहीं भी बहुवचन का भाव नहीं था।
शायद इसलिए कि पिता की जगह कभी दो नहीं हो सकते।माँ के दर्जे पर कई रिश्ते जुड़ सकते हैं,लेकिन पिता… वो हमेशा एक ही होता है,इसीलिए उसके जाने के बाद जो खालीपन आता है,
वो कभी नहीं भरता।
पिता — वो जो खुद जलकर बच्चों को रौशनी देता है।वो जो थक कर भी अपने बेटे-बेटी के सपनों को जीता है।कभी रातों को जागता है, कभी दिनभर खटता है,
और बदले में बस एक मुस्कान चाहता है।
पिता वो है जो साया भी है और धूप भी,वो है जो सपना भी है और उसका स्वरूप भी।वो है जो बच्चों को हर दुआ में रखता है,
और बिना माँगे सब कुछ कुर्बान कर देता है।
वो है जो खुद भूखा रहता है, पर बच्चों को खिलाता है,जो दुख छिपाकर भी हँसता है,जिसके हाथों की कठोरता से उसका संघर्ष झलकता है,
मगर दिल ऐसा होता है जो बच्चों के हर दर्द पर तड़प जाता है।
बाप की गैर मौजूदगी का अहसास
बहुत वक़्त बाद मेरे सपने में आए थे मेरे पापा,वही चमकता चेहरा, वही मुहब्बत भरी आँखें,जैसे बरसों की थकान लिए मुस्कुरा रहे हों।मैं दौड़कर उनके पैरों में बैठ गया,
जाते-जाते बस इतना कहा:
"खुश रहा करो… मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ, बस दिखता नहीं हूँ।"
अब्बा! कैसे खुश रहूँ? जब जिंदगी की धूप में तुम्हारी छांव नहीं रही,जब कंधे पर सिर रखने की जगह नहीं रही,
जब सीख देने वाला खजाना चला गया,जब पीठ थपथपाने वाला हाथ उठ गया!
अब जब थकता हूँ, तो कोई नहीं कहता:"बेटा, आ जा… मैं हूँ ना!"
अब जब हारता हूँ, तो कोई नहीं कहता:"फिक्र मत कर, मैं तेरे साथ हूँ!"
अब जब दुनिया सताती है, तो कोई नहीं कहता:
"परेशान मत हो, तेरा पिता ज़िंदा है!"
अब्बा! आप तो कहते थे — "खुश रहा करो"पर आपके बिना अब खुशी नाम की चीज़ कहीं नहीं रही।घर वही है, दीवारें वही हैं,
पर वो सुकून, वो भरोसा, वो आसरा — सब खो गया है।
बाप के बिना बेटा अनाथ नहीं होता,वो अधूरा हो जाता है।वो जीत कर भी हार जाता है,
वो जीते हुए भी मर जाता है।
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Conclusion:
पिता… एक ऐसा अनमोल रत्न है,जो जीवन की कठिन राहों पर हमारे लिए उजाला बनकर चलता है,और अक्सर उसके योगदान को तब समझा जाता है, जब वो हमारे बीच नहीं रहता।उसके बिना जीवन अधूरा लगता है,और उसकी यादें — एक साया बनकर जीवन भर साथ चलती हैं।
FAQs:
1. पिता का जीवन में क्या महत्व होता है?
पिता जीवन का वो आधार होते हैं जो चुपचाप त्याग और मेहनत से बच्चों का भविष्य बनाते हैं। वे सुरक्षा, विश्वास और मार्गदर्शन का प्रतीक होते हैं।
2. क्या पिता के जाने के बाद जीवन अधूरा हो जाता है?
जी हाँ, पिता के बिना जीवन का एक मजबूत सहारा चला जाता है। उनका ना होना एक गहरा खालीपन पैदा करता है जिसे कोई भर नहीं सकता।
3. इस लेख में पिता को कैसे दर्शाया गया है?
लेख में पिता को एक छांव की तरह दर्शाया गया है — जो खुद तपकर बच्चों को सुकून देता है। उनके त्याग, ममता और अदृश्य संघर्षों को दिल से महसूस किया गया है।
4. क्या यह लेख उन लोगों के लिए है जो अपने पिता को खो चुके हैं?
जी हाँ, यह लेख विशेष रूप से उन लोगों के जज़्बातों को बयाँ करता है जिन्होंने अपने पिता को खो दिया है, और उन्हें भावनात्मक सहारा देने का कार्य करता है।
باپ کا وجود — ایک چھاؤں جیسی موجودگی، جس کی جگہ کوئی نہیں لے سکتا
جب زندگی کی تپتی دھوپ ہمیں جھلسانے لگتی ہے، تو ایک سایہ ہوتا ہے جو ہر حال میں ہمیں سکون دیتا ہے — وہ سایہ ہے 'باپ' کا۔
باپ... ایک ایسا کردار، جو اپنی ضروریات کو پیچھے چھوڑ کر ہماری خواہشات کو بغیر ظاہر کیے پورا کرتا ہے۔ اس کی ممتا ماں جیسی تو نہیں دکھتی، مگر اس کی محنت، قربانی اور فکر کہیں زیادہ گہری ہوتی ہے۔ وہ کم بولتا ہے، مگر اس کی آنکھوں میں پورا جہان بولتا ہے۔
باپ کا وجود — وہ چھاؤں ہے، جو ان کے جانے کے بعد تاعمر تلاشتی رہ جاتی ہے... جس کے سر پر باپ کا سایہ ہوتا ہے، وہ ہر طوفان میں بھی محفوظ ہوتا ہے... باپ چلے جائیں تو زندگی کی دھوپ اور تیز لگنے لگتی ہے... باپ — ایک ایسا نام، جس کی جگہ کبھی کوئی نہیں لے سکتا...
باپ: ایک چھاؤں جیسا وجود
بچپن میں جب ہم گرتے ہیں، ماں دوڑتی ہے اٹھانے کے لیے — اور باپ؟ وہ تھوڑی دور کھڑا ہو کر ہمیں گر کر اٹھنا سکھاتا ہے۔ وہ جانتا ہے کہ زندگی آسان نہیں ہے، اس لیے وہ ہمیں مضبوط بناتا ہے۔وہ خود کی خواہشیں قربان کر دیتا ہے — نئی قمیض، پسندیدہ کھانا، سکون کی نیند — سب کچھ چھوڑ دیتا ہے تاکہ ہم اچھی زندگی جی سکیں۔
باپ کا پیار: بغیر شور کا سمندر
باپ اپنے جذبات کو الفاظ میں کم ہی کہتا ہے، لیکن اس کے ہر فیصلے میں ہمارے لیے محبت چھپی ہوتی ہے۔جب وہ دیر رات تک کام کرتا ہے، جب اسکول کی فیس وقت پر بھرتا ہے، جب خود پرانے کپڑے پہن کر ہمیں نئے دلاتا ہے — یہ سب اس کا 'آئی لو یو' کہنے کا طریقہ ہوتا ہے۔
ایک باپ دن رات کی محنت میں اپنے خوابوں کو دھیرے دھیرے کھو دیتا ہے، لیکن وہ شکایت نہیں کرتا۔
وہ بچوں کی مسکراہٹ کو ہی اپنی جیت مانتا ہے۔
کبھی سوچا ہے کہ وہ کب تھکتا ہے؟
شاید تب جب ہم اس کی اہمیت کو سمجھنے میں دیر کر دیتے ہیں...
باپ واقعی ایک چھاؤں جیسا ہے — ہمیشہ ہمارے سر پر رہتا ہے، پر ہم تب تک اسے نہیں دیکھتے جب تک وہ چھاؤں ہٹ نہ جائے۔
یہ مضمون باپ کی قربانیوں، خاموش محبت اور اس کی موجودگی کی اہمیت کو اجاگر کرتا ہے۔ باپ کا کردار زندگی میں ایک مضبوط ستون کی مانند ہوتا ہے، جو ہمیں ہر مشکل میں سہارا دیتا ہے۔
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