✦ मियाँ–बीवी की पुरसुकून ज़िंदगी का राज़ :शादी शुदाह खुशहाल ज़िन्दगी कैसे जीएं
![]() |
| Rishton ko mazboot banane ke tarike |
असल में मियाँ–बीवी की खुशहाल ज़िंदगी का राज़ कुछ खास आदतों और समझदारी पर आधारित होता है और इस लेख Miya Biwi ki Pursakoon Zindagi ka Raaz में इसी को समझाया गया है।
✦ असल राज़ समझदारी और हुस्न ए अख़लाक़
या फिर आपकी खूबसूरती इसकी वजह है? या ढेर सारे बच्चों का होना?
शादीशुदा ज़िंदगी का असली सुकून, अल्लाह की मदद के बाद, औरत के रवैये में होता है।
ज़्यादा बच्चे: खुशहाल ज़िंदगी की वजह बच्चे भी नहीं हैं। कई औरतों के बच्चे होते हुए भी वे शौहर की मोहब्बत से महरूम रहती हैं, बल्कि कभी-कभी बात तलाक तक पहुँच जाती है।
खाना बनाना: खाना बनाने की कला भी इसका राज़ नहीं है। बहुत सी औरतें बेहतरीन खाना बनाती हैं, फिर भी उन्हें शौहर की बदसलूकी का सामना करना पड़ता है।
सवाल:तो फिर आपकी खुशहाल ज़िंदगी का असली राज़ क्या है?
जब मेरा शौहर गुस्से में होता है तो मैं खामोशी अख़्तियार कर लेती हूँ।लेकिन ऐसी खामोशी जिसमें इज़्ज़त और नरमी शामिल होती है।मैं सिर झुका लेती हूँ ताकि ये महसूस न हो कि मैं मज़ाक उड़ा रही हूँ।
कई औरतें चुप तो रहती हैं लेकिन उनके अंदाज़ में ताना या मज़ाक झलकता है, जो और बड़ा नुकसान करता है।
जब शौहर गुस्से में हो, तो सबसे अहम चीज़ है इज़्ज़त के साथ खामोशी।सिर्फ चुप रहना काफी नहीं, बल्कि चुप्पी में एहतिराम होना चाहिए।मज़ाक या ताना देने वाली खामोशी रिश्ते को और बिगाड़ देती है।
जवाब
अगर मैं कमरे से बाहर चली जाऊँ तो शौहर को लगेगा कि मैं उससे भाग रही हूँ और उसकी बातें सुनना ही नहीं चाहती।
ऐसे वक़्त पर चुप रहना और तब तक किसी बात पर बहस न करना चाहिए जब तक उसका गुस्सा ठंडा न हो जाए।
जब वो बोल-बोलकर थक जाता है तो मैं नरम लहजे में पूछती हूँ: “पूरी हो गई आपकी बात?”
उसके बाद मैं अपने कामों में लग जाती हूँ।
गुस्से की हालत में अगर बीवी कमरे से निकल जाए तो शौहर को लगता है कि वो उससे भाग रही है।
सवाल: क्या उसके बाद आप बातचीत बंद कर देती हैं?
हफ़्तों तक शौहर से बातचीत बंद रखना एक दो धार वाली तलवार है।
अगर शौहर इसकी आदत डाल ले तो रिश्ता धीरे-धीरे नफ़रत में बदल सकता है।
कभी भी दिनों तक खामोशी या बातचीत बंद करने की आदत न अपनाएँ।यह तरीका एक दुधारी तलवार है।
सवाल: तो फिर आप करती क्या हैं?
दरअसल उस वक़्त उसे इसी की ज़रूरत होती है।
फिर मैं उससे सामान्य अंदाज़ में बातचीत करती हूँ।
वो अक्सर अपनी सख़्त बातों पर शर्मिंदा होता है और प्यार से बातें करने लगता है।
अक्सर शौहर अपनी कठोर बातों पर शर्मिंदगी जताता है और अच्छा बर्ताव करने लगता है।
Read This Also: Aakhir kya wajah hai, jahannum me Auraten Zayadah jayengi?
सवाल: और आप उसकी बातें मान लेती हैं?
क्या ये ठीक होगा कि जब शौहर गुस्से में कुछ कहे तो मैं मान लूँ, और जब वो सुकून से मोहब्बत भरी बातें करे तो मैं उसे न मानूँ?
जब शौहर बोल-बोलकर थक जाए, तो कुछ देर उसे आराम करने दिया जाए।फिर बीवी मुलायम अंदाज़ में पूछे: “पूरी हो गई आपकी बात?”
जवाब
मेरी असली इज़्ज़त-ए-नफ़्स इसी में है कि मेरा शौहर मुझसे राज़ी हो और हमारी ज़िंदगी पुसरकून रहे।
सच तो ये है कि मियाँ–बीवी के बीच अलग-अलग इज़्ज़त-ए-नफ़्स नाम की कोई चीज़ नहीं होती।
जब दोनों एक-दूसरे का लिबास (कपड़ा/ढाल) हैं तो फिर अलग-अलग अहंकार (ego) की जगह कहाँ?
बीवी की असली इज़्ज़त-ए-नफ़्स (self-respect) उसी में है कि शौहर उससे राज़ी हो और घर का माहौल पुरसुकून रहे।असल इज़्ज़त तब है जब दोनों एक-दूसरे के लिए सुकून का ज़रिया बनें।
✦ पुरसुकून ज़िंदगी का राज़ किन चीज़ों में नहीं है?
दौलत में नहीं
बहुत सी मालदार औरतें हैं लेकिन उनकी शादीशुदा ज़िंदगी नाखुशगवार है। शौहर अक्सर उनसे दूर भागता है।बच्चों में नहीं
बच्चे होने के बावजूद बहुत सी औरतें शौहर की मोहब्बत से महरूम रहती हैं, बल्कि कभी-कभी रिश्ता टूटने तक की नौबत आ जाती है।खाना पकाने की कला में नहीं
बहुत सी औरतें बेहतरीन खाना बनाती हैं, मगर फिर भी उन्हें शौहर की बदसुलूकी का सामना करना पड़ता है।
✦ पुरसुकून ज़िंदगी का राज़ किन चीज़ों में है?
✦ 1. मोहब्बत और रहमत का रिश्ता
क़ुरआन में अल्लाह तआला ने निकाह को मवद्दत (मोहब्बत) और रहमत (रहमत/सुकून) का जरिया बताया है।
- मियाँ–बीवी का रिश्ता सिर्फ जिस्मानी नहीं बल्कि रूहानी भी है।
- सच्ची मोहब्बत छोटी-छोटी कमियों को नज़रअंदाज़ करती है और रिश्ते को मज़बूत बनाती है।
✦ 2. इज्ज़त और एहतिराम
पुरसुकून ज़िंदगी की सबसे बड़ी कुंजी इज्ज़त है।
- बीवी शौहर की इज़्ज़त करे और शौहर बीवी की।
- ग़लती निकालने के बजाय हौसला-अफ़ज़ाई करना और अच्छे कामों की तारीफ़ करना दिलों को जोड़ता है।
✦ 3. सब्र और बर्दाश्त
कोई भी इंसान मुकम्मल नहीं होता।
- शादीशुदा ज़िंदगी में मतभेद होना लाज़मी है लेकिन सब्र से काम लेना ही असल कामयाबी है।
- एक-दूसरे की खामियों को बर्दाश्त करना और गलती पर माफ़ कर देना रिश्ते को लम्बे अरसे तक मजबूती देता है।
✦ 4. आपसी मशविरा और ताल्लुकात
- घर की मामूली से मामूली बात में भी मशविरा करने से मोहब्बत बढ़ती है।
- शौहर अगर बीवी को अहमियत दे और बीवी शौहर को भरोसे का एहसास दिलाए तो दोनों के दरमियान ताल्लुक मज़बूत होते हैं।
✦ 5. हुस्न-ए-अख़लाक़
अख़लाक़ (Character) का असर लफ़्ज़ों से ज़्यादा होता है।
- अच्छा लहजा, नरमी और मुस्कुराहट रिश्ते में नई रौनक भरते हैं।
- मियाँ–बीवी का एक-दूसरे से अच्छा बर्ताव घर को जन्नत बना देता है।
✦ 6. दीनदारी और अल्लाह से ताल्लुक
- जब दोनों अपने रिश्ते को इबादत समझकर निभाते हैं तो अल्लाह तआला बरकत अता करता है।
- नमाज़, दुआ और कुरआन की तिलावत घर के माहौल को नूरानियत और सुकून से भर देती है।
Read This Also: Aurat kaise apne shauhar ko Deewana banaye jaane iske Raaz
✦ निष्कर्ष (Conclusion)
इस 70 साल की बुज़ुर्ग महिला की बातें साफ़ करती हैं कि खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी का असली राज़ दौलत, बच्चे या खाना बनाने की कला में नहीं है।
असल राज़ है – सब्र, इज़्ज़त के साथ खामोशी, प्यार भरा रवैया और समझदारी। यही वो चीज़ें हैं जो एक मामूली से घर को जन्नत में बदल सकती हैं।
मियाँ–बीवी की पुरसुकून ज़िंदगी मोहब्बत, एहतिराम, सब्र और दीनी सोच पर क़ायम होती है। अगर दोनों एक-दूसरे की खामियों को नज़रअंदाज़ करके अच्छाइयों को अपनाएँ, तो यह रिश्ता न सिर्फ दुनियावी सुकून देगा बल्कि आखिरत में भी कामयाबी का ज़रिया बनेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q 1: क्या दौलत से शादीशुदा ज़िंदगी पुसरकून बन जाती है?नहीं, बहुत सी मालदार औरतों की ज़िंदगी भी नाख़ुश रहती है।
Q 2: शौहर के गुस्से के समय बीवी को क्या करना चाहिए?
खामोश रहना चाहिए, लेकिन उसमें इज़्ज़त और नरमी शामिल होनी चाहिए।
Q 3: क्या लंबी नाराज़गी (दिनों तक बातचीत बंद) करना सही है?
नहीं, इससे रिश्ता धीरे-धीरे नफ़रत में बदल सकता है।
Q 4: असली इज़्ज़त-ए-नफ़्स किसमें है?
असली इज़्ज़त उसी में है कि शौहर राज़ी हो और घर का माहौल पुसरकून रहे
5. मियाँ–बीवी के बीच सबसे अहम चीज़ क्या है?
Q6. क्या हर छोटी बात पर बहस करना ज़रूरी है?
Q7. घर के फैसलों में बीवी की राय की अहमियत है?
✦ میاں بیوی کی پُرسکون زندگی کا راز
![]() |
| Narazgi me rishton ko kaise sambhalein |
شادی ایک ایسا رشتہ ہے جو صرف دو افراد کے درمیان نہیں بلکہ دو خاندانوں، دو سوچوں اور دو دلوں کے ملاپ کا نام ہے۔ ہر شادی شدہ جوڑا چاہتا ہے کہ اس کی زندگی سکون اور محبت سے بھری ہو۔ لیکن اکثر لوگ یہ سمجھنے میں غلطی کرتے ہیں کہ اس کا دارومدار دولت، خوبصورتی یا اولاد پر ہے۔لیکن حقیقت یہ ہے کہ صرف دولت، خوبصورتی یا اولاد کی موجودگی سے زندگی پُرسکون نہیں بنتی۔ اصل میں میاں بیوی کی خوشحال زندگی کا راز چند خاص عادتوں اور سمجھداری پر مبنی ہوتا ہے۔ اس موضوع پر ایک 70 سالہ بزرگ خاتون کا انٹرویو ہوا جس میں انہوں نے اپنی پُرسکون شادی شدہ زندگی کا راز بتایا۔
اصل راز سمجھداری اور حُسنِ اخلاق
✦ انٹرویو کی جھلکیاں
✦ پُرسکون زندگی کن چیزوں میں نہیں ہے؟
✦ اصل راز – سمجھداری اور حسنِ اخلاق
✦ نتیجہ
اس ستر سالہ خاتون کی باتوں سے یہ حقیقت واضح ہو جاتی ہے کہ خوشحال ازدواجی زندگی کا تعلق نہ دولت سے ہے، نہ اولاد سے اور نہ ہی کھانا پکانے کی مہارت سے۔ اصل راز ہے برداشت، خاموشی میں عزت، محبت بھرا رویہ اور سمجھداری۔ یہی وہ چیزیں ہیں جو ایک عام سے گھر کو جنت میں بدل دیتی ہیں۔غصے کے وقت خاموشی، بعد میں نرمی اور محبت بھرا رویہ — یہی وہ راستہ ہے جو شادی شدہ زندگی کو جنت بنا دیتا ہے۔
✦ اکثر پوچھے جانے والے سوالات (FAQs)
سوال 1: کیا دولت سے ازدواجی زندگی پُرسکون ہو جاتی ہے؟
- نہیں، بہت سی مالدار عورتوں کی زندگی بھی ناخوش رہتی ہے۔
سوال 2: غصے کے وقت بیوی کو کیا کرنا چاہیے؟
- خاموش رہنا چاہیے مگر ایسی خاموشی جس میں احترام ہو۔ اس میں عزت اور نرمی ہونی چاہیے۔
سوال 3: کیا دنوں تک بول چال بند رکھنا درست ہے؟
- نہیں، یہ عادت رشتے میں نفرت پیدا کر دیتی ہے۔
سوال 4: اصل عزتِ نفس کس میں ہے؟
- اصل عزت اسی میں ہے کہ شوہر راضی ہو اور گھر پُرسکون ہو۔


0 Comments
please do not enter any spam link in the comment box.thanks