Miya Biwi ki Pursakoon Zindagi ka Raaz (Hindi/Urdu)

"मियाँ–बीवी की खुशहाल ज़िंदगी न तो दौलत पर टिकी है, न ही बच्चों या खाना बनाने की कला पर। असली राज़ है सब्र, हुस्न-ए-अख़लाक़, मोहब्बत और समझदारी। गुस्से के वक्त खामोशी, बाद में नरमी और मोहब्बत भरा व्यवहार—यही वो रास्ता है जो शादीशुदा ज़िंदगी को जन्नत बना देता है।

शादी ज़िंदगी का अहम मोड़ है। यह रिश्ता सिर्फ दो लोगों का मेल नहीं बल्कि दो दिलों, दो सोचों और दो खानदानों के जुड़ने का नाम है। मियाँ–बीवी की ज़िंदगी तभी पुरसुकून और कामयाब बन सकती है जब उसमें मोहब्बत, एहतिराम (respect) और सब्र का ताना-बाना बुना जाए।

मियाँ–बीवी की पुरसुकून ज़िंदगी का राज़ :शादी शुदाह खुशहाल ज़िन्दगी कैसे जीएं 

✍️ By: Mohib Tahiri | 🕋 motivational article|Rishton ki Ahmiyat|Pursakoon zindagi ka Raaz 🕰 Updated:23 Aug 2025
Narazgi me rishton ko kaise sambhalein
Rishton ko mazboot banane ke tarike

शादी ऐसा रिश्ता है जो केवल दो व्यक्तियों के बीच का मेल नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो सोचों और दो दिलों का जुड़ाव है। हर कोई चाहता है कि उसकी शादीशुदा ज़िंदगी खुशहाल सुकून और मोहब्बत से भरी हो। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर धोखा खा जाते हैं कि इसका राज़ केवल दौलत, खूबसूरती या बच्चों में छुपा है। इस विषय पर एक 70 वर्षीय बुज़ुर्ग महिला का interview हुआ जिसमें उन्होंने अपनी पुसरकून और कामयाब ज़िंदगी का असली राज़ बताया।

      असल में मियाँ–बीवी की खुशहाल ज़िंदगी का राज़ कुछ खास आदतों और समझदारी पर आधारित होता है और इस लेख Miya Biwi ki Pursakoon Zindagi ka Raaz में इसी को समझाया गया है। 

असल राज़ समझदारी और हुस्न ए अख़लाक़ 

एक interview में एक सत्तर साल की खातून से पूछा गया कि उनकी शादी शुदाह खुशहाल ज़िन्दगी का राज़ क्या है ? तो उन्होंने ने जो बताया अगर आप भी उसपर अमल करें तो आप की भी जिंदगी एक खुशहाल ज़िन्दगी बन सकती है। 

सवाल:
क्या आपकी पुसरकून शादीशुदा ज़िंदगी का राज़ ये है कि आप खाना बनाने में बहुत माहिर थीं?
या फिर आपकी खूबसूरती इसकी वजह है? या ढेर सारे बच्चों का होना?
जवाब:

शादीशुदा ज़िंदगी का असली सुकून, अल्लाह की मदद के बाद, औरत के रवैये में होता है।

दौलत: दौलत कारण नहीं है। कई मालदार औरतें हैं जिनकी ज़िंदगी नर्क बनी हुई है, और उनके शौहर उनसे दूर भागते हैं।
ज़्यादा बच्चे: खुशहाल ज़िंदगी की वजह बच्चे भी नहीं हैं। कई औरतों के बच्चे होते हुए भी वे शौहर की मोहब्बत से महरूम रहती हैं, बल्कि कभी-कभी बात तलाक तक पहुँच जाती है।
खाना बनाना: खाना बनाने की कला भी इसका राज़ नहीं है। बहुत सी औरतें बेहतरीन खाना बनाती हैं, फिर भी उन्हें शौहर की बदसलूकी का सामना करना पड़ता है।
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सवाल:तो फिर आपकी खुशहाल ज़िंदगी का असली राज़ क्या है?

जवाब:

जब मेरा शौहर गुस्से में होता है तो मैं खामोशी अख़्तियार कर लेती हूँ।लेकिन ऐसी खामोशी जिसमें इज़्ज़त और नरमी शामिल होती है।मैं सिर झुका लेती हूँ ताकि ये महसूस न हो कि मैं मज़ाक उड़ा रही हूँ।
कई औरतें चुप तो रहती हैं लेकिन उनके अंदाज़ में ताना या मज़ाक झलकता है, जो और बड़ा नुकसान करता है।

वज़ाहत:

जब शौहर गुस्से में हो, तो सबसे अहम चीज़ है इज़्ज़त के साथ खामोशी।सिर्फ चुप रहना काफी नहीं, बल्कि चुप्पी में एहतिराम होना चाहिए।मज़ाक या ताना देने वाली खामोशी रिश्ते को और बिगाड़ देती है।


Khamoshi bhi mohabbat ka ek husn hoti hai, bas usme izzat aur narmi honi chahiye.Asli sukoon paison se nahi, ek dusre ki izzat karne se milta hai.

सवाल: ऐसे मौक़े पर आप कमरे से बाहर क्यों नहीं चली जातीं?

जवाब

अगर मैं कमरे से बाहर चली जाऊँ तो शौहर को लगेगा कि मैं उससे भाग रही हूँ और उसकी बातें सुनना ही नहीं चाहती।
ऐसे वक़्त पर चुप रहना और तब तक किसी बात पर बहस न करना चाहिए जब तक उसका गुस्सा ठंडा न हो जाए।
जब वो बोल-बोलकर थक जाता है तो मैं नरम लहजे में पूछती हूँ: “पूरी हो गई आपकी बात?”
उसके बाद मैं अपने कामों में लग जाती हूँ।

वज़ाहत

गुस्से की हालत में अगर बीवी कमरे से निकल जाए तो शौहर को लगता है कि वो उससे भाग रही है।

बेहतर यह है कि वहीं रहकर खामोश सुना जाए जब तक वो ठंडा न हो जाए।
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सवाल: क्या उसके बाद आप बातचीत बंद कर देती हैं?

जवाब
नहीं! ये बहुत बुरी आदत है।
हफ़्तों तक शौहर से बातचीत बंद रखना एक दो धार वाली तलवार है।
अगर शौहर इसकी आदत डाल ले तो रिश्ता धीरे-धीरे नफ़रत में बदल सकता है।

वज़ाहत

कभी भी दिनों तक खामोशी या बातचीत बंद करने की आदत न अपनाएँ।यह तरीका एक दुधारी तलवार है।

अगर शौहर इस आदत का आदी हो गया तो रिश्ता धीरे-धीरे नफ़रत में बदल सकता है।

सवाल: तो फिर आप करती क्या हैं?

जवाब
दो–तीन घंटे बाद मैं शौहर के पास एक गिलास जूस या एक कप चाय लेकर जाती हूँ और मोहब्बत से कहती हूँ: पी लीजिए।
दरअसल उस वक़्त उसे इसी की ज़रूरत होती है।
फिर मैं उससे सामान्य अंदाज़ में बातचीत करती हूँ।
वो अक्सर अपनी सख़्त बातों पर शर्मिंदा होता है और प्यार से बातें करने लगता है।

वज़ाहत
कुछ घंटे बाद शौहर के पास प्यार भरे अंदाज़ में जाना—एक कप चाय या जूस पेश करना।इस मौके पर बातचीत शुरू करना और यह जताना कि कोई नाराज़गी नहीं।
अक्सर शौहर अपनी कठोर बातों पर शर्मिंदगी जताता है और अच्छा बर्ताव करने लगता है।

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सवाल: और आप उसकी बातें मान लेती हैं?

जवाब
बिल्कुल! मैं कोई नादान नहीं हूँ, मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा होता है।
क्या ये ठीक होगा कि जब शौहर गुस्से में कुछ कहे तो मैं मान लूँ, और जब वो सुकून से मोहब्बत भरी बातें करे तो मैं उसे न मानूँ?

वज़ाहत

जब शौहर बोल-बोलकर थक जाए, तो कुछ देर उसे आराम करने दिया जाए।फिर बीवी मुलायम अंदाज़ में पूछे: “पूरी हो गई आपकी बात?”

इसके बाद अपने कामों में मशगूल हो जाए।

 Jab shohar gussa kare, to bewi ka sabr us ghar ko jannat bana deta hai.Behtareen biwi woh hai jo shohar ke gusse me bhi uski izzat barkarar rakhe.

सवालऔर आपकी इज़्ज़त-ए-नफ़्स (Self Respect)?

जवाब

मेरी असली इज़्ज़त-ए-नफ़्स इसी में है कि मेरा शौहर मुझसे राज़ी हो और हमारी ज़िंदगी पुसरकून रहे।
सच तो ये है कि मियाँ–बीवी के बीच अलग-अलग इज़्ज़त-ए-नफ़्स नाम की कोई चीज़ नहीं होती।
जब दोनों एक-दूसरे का लिबास (कपड़ा/ढाल) हैं तो फिर अलग-अलग अहंकार (ego) की जगह कहाँ?

बीवी की असली इज़्ज़त-ए-नफ़्स (self-respect) उसी में है कि शौहर उससे राज़ी हो और घर का माहौल पुरसुकून रहे।असल इज़्ज़त तब है जब दोनों एक-दूसरे के लिए सुकून का ज़रिया बनें।

मियाँ–बीवी जब एक-दूसरे का लिबास हैं तो फिर अलग-अलग अहंकार (ego) की गुंजाइश ही नहीं रहती।

पुरसुकून ज़िंदगी का राज़ किन चीज़ों में नहीं है?

  1. दौलत में नहीं
    बहुत सी मालदार औरतें हैं लेकिन उनकी शादीशुदा ज़िंदगी नाखुशगवार है। शौहर अक्सर उनसे दूर भागता है।

  2. बच्चों में नहीं
    बच्चे होने के बावजूद बहुत सी औरतें शौहर की मोहब्बत से महरूम रहती हैं, बल्कि कभी-कभी रिश्ता टूटने तक की नौबत आ जाती है।

  3. खाना पकाने की कला में नहीं
    बहुत सी औरतें बेहतरीन खाना बनाती हैं, मगर फिर भी उन्हें शौहर की बदसुलूकी का सामना करना पड़ता है।

पुरसुकून ज़िंदगी का राज़ किन चीज़ों में है?

✦ 1. मोहब्बत और रहमत का रिश्ता

क़ुरआन में अल्लाह तआला ने निकाह को मवद्दत (मोहब्बत) और रहमत (रहमत/सुकून) का जरिया बताया है।

  • मियाँ–बीवी का रिश्ता सिर्फ जिस्मानी नहीं बल्कि रूहानी भी है।
  • सच्ची मोहब्बत छोटी-छोटी कमियों को नज़रअंदाज़ करती है और रिश्ते को मज़बूत बनाती है।

✦ 2. इज्ज़त और एहतिराम

पुरसुकून ज़िंदगी की सबसे बड़ी कुंजी इज्ज़त है।

  • बीवी शौहर की इज़्ज़त करे और शौहर बीवी की।
  • ग़लती निकालने के बजाय हौसला-अफ़ज़ाई करना और अच्छे कामों की तारीफ़ करना दिलों को जोड़ता है।

✦ 3. सब्र और बर्दाश्त

कोई भी इंसान मुकम्मल नहीं होता।

  • शादीशुदा ज़िंदगी में मतभेद होना लाज़मी है लेकिन सब्र से काम लेना ही असल कामयाबी है।
  • एक-दूसरे की खामियों को बर्दाश्त करना और गलती पर माफ़ कर देना रिश्ते को लम्बे अरसे तक मजबूती देता है।

✦ 4. आपसी मशविरा और ताल्लुकात

  • घर की मामूली से मामूली बात में भी मशविरा करने से मोहब्बत बढ़ती है।
  • शौहर अगर बीवी को अहमियत दे और बीवी शौहर को भरोसे का एहसास दिलाए तो दोनों के दरमियान ताल्लुक मज़बूत होते हैं।

✦ 5. हुस्न-ए-अख़लाक़

अख़लाक़ (Character) का असर लफ़्ज़ों से ज़्यादा होता है।

  • अच्छा लहजा, नरमी और मुस्कुराहट रिश्ते में नई रौनक भरते हैं।
  • मियाँ–बीवी का एक-दूसरे से अच्छा बर्ताव घर को जन्नत बना देता है।

✦ 6. दीनदारी और अल्लाह से ताल्लुक

  • जब दोनों अपने रिश्ते को इबादत समझकर निभाते हैं तो अल्लाह तआला बरकत अता करता है।
  • नमाज़, दुआ और कुरआन की तिलावत घर के माहौल को नूरानियत और सुकून से भर देती है।

✦ निष्कर्ष (Conclusion)

इस 70 साल की बुज़ुर्ग महिला की बातें साफ़ करती हैं कि खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी का असली राज़ दौलत, बच्चे या खाना बनाने की कला में नहीं है।
असल राज़ है – सब्र, इज़्ज़त के साथ खामोशी, प्यार भरा रवैया और समझदारी। यही वो चीज़ें हैं जो एक मामूली से घर को जन्नत में बदल सकती हैं।

मियाँ–बीवी की पुरसुकून ज़िंदगी मोहब्बत, एहतिराम, सब्र और दीनी सोच पर क़ायम होती है। अगर दोनों एक-दूसरे की खामियों को नज़रअंदाज़ करके अच्छाइयों को अपनाएँ, तो यह रिश्ता न सिर्फ दुनियावी सुकून देगा बल्कि आखिरत में भी कामयाबी का ज़रिया बनेगा।

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मोहब्बत, एक दूसरे का एहतराम और सब्र यह न सिर्फ रिश्तों को मज़बूत बनाएगा बल्कि दुनियावी सुकून देगा और आखिरत में भी कामयाबी का ज़रिया बनेगा।


Miyan biwi ke darmiyan izzat hi mohabbat ka asal zevar hai.Khushhaal zindagi ka raaz sabr aur samajhdari me chhupa hai.


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q 1: क्या दौलत से शादीशुदा ज़िंदगी पुसरकून बन जाती है?
नहीं, बहुत सी मालदार औरतों की ज़िंदगी भी नाख़ुश रहती है।

Q 2: शौहर के गुस्से के समय बीवी को क्या करना चाहिए?
खामोश रहना चाहिए, लेकिन उसमें इज़्ज़त और नरमी शामिल होनी चाहिए।

Q 3: क्या लंबी नाराज़गी (दिनों तक बातचीत बंद) करना सही है?
नहीं, इससे रिश्ता धीरे-धीरे नफ़रत में बदल सकता है।

Q 4: असली इज़्ज़त-ए-नफ़्स किसमें है?
असली इज़्ज़त उसी में है कि शौहर राज़ी हो और घर का माहौल पुसरकून रहे

5. मियाँ–बीवी के बीच सबसे अहम चीज़ क्या है?
 सबसे अहम चीज़ मोहब्बत और इज़्ज़त है।

Q6. क्या हर छोटी बात पर बहस करना ज़रूरी है?
 नहीं, समझदारी से नज़रअंदाज़ करना ही बेहतर है।

Q7. घर के फैसलों में बीवी की राय की अहमियत है?
 जी हाँ, मशविरा करने से मोहब्बत और भरोसा बढ़ता है।

Do dil jab ek doosre ka libaas ban jaen, to zindagi sukoon se bhar jaati hai.Chup rehna kabhi kabhi jawab dene se zyada asar rakhta hai.

✦ میاں بیوی کی پُرسکون زندگی کا راز

Biwi ki zimmedari Islam me
Narazgi me rishton ko kaise sambhalein

شادی ایک ایسا رشتہ ہے جو صرف دو افراد کے درمیان نہیں بلکہ دو خاندانوں، دو سوچوں اور دو دلوں کے ملاپ کا نام ہے۔ ہر شادی شدہ جوڑا چاہتا ہے کہ اس کی زندگی سکون اور محبت سے بھری ہو۔ لیکن اکثر لوگ یہ سمجھنے میں غلطی کرتے ہیں کہ اس کا دارومدار دولت، خوبصورتی یا اولاد پر ہے۔لیکن حقیقت یہ ہے کہ صرف دولت، خوبصورتی یا اولاد کی موجودگی سے زندگی پُرسکون نہیں بنتی۔ اصل میں میاں بیوی کی خوشحال زندگی کا راز چند خاص عادتوں اور سمجھداری پر مبنی ہوتا ہے۔ اس موضوع پر ایک 70 سالہ بزرگ خاتون کا انٹرویو ہوا جس میں انہوں نے اپنی پُرسکون شادی شدہ زندگی کا راز بتایا۔


اصل راز سمجھداری اور حُسنِ اخلاق

ایک interview میں ایک ستّر سال کی خاتون سے پوچھا گیا کہ اُن کی شادی شدہ خوش حال ذندگی کا راز کیا ہے ؟ تو اُنہوں نے جو بتایا اگر آپ بھی اُس پر عمل کریں تو آپ کی ذندگی بھی ایک خُوش حال ذندگی بن سکتی ہے۔

انٹرویو کی جھلکیاں

سوال:

کیا آپ کے پُرسکون ازدواجی زندگی کا راز یہ ہے کہ آپ کھانا پکانے میں بہت ماہر تھیں؟ یا پھر آپ کی خوبصورتی اس کی وجہ ہے؟ یا ڈھیر سارے بچوں کا ہونا؟

جواب:

پُرسکون شادی شدہ زندگی کا دار و مدار اللہ کی توفیق کے بعد عورت کے ہاتھ میں ہے۔

  • اس سلسلے میں مال کو وجہ نہ سمجھیے، بہت سی مالدار عورتوں کی زندگی اجیرن ہے۔
  • خوشحال زندگی کا سبب اولاد بھی نہیں، کئی عورتوں کے بچے ہیں مگر وہ شوہر کی محبت سے محروم ہیں بلکہ بعض اوقات طلاق تک نوبت آجاتی ہے۔
  • کھانا پکانے کی مہارت بھی اصل راز نہیں، کئی عورتیں دن رات کھانا بناتی ہیں پھر بھی شوہر کی بدسلوکی کا شکوہ رہتا ہے۔

سوال:

تو پھر خوشحال زندگی کا راز کیا ہے؟

جواب:

جب میرا شوہر انتہائی غصے میں ہوتا ہے تو میں خاموشی کا سہارا لیتی ہوں، مگر ایسی خاموشی جس میں احترام شامل ہو۔

  • افسوس کے ساتھ سر جھکا لیتی ہوں تاکہ یہ ظاہر نہ ہو کہ میں اس کا مذاق اڑا رہی ہوں۔
  • بعض خواتین خاموش تو ہو جاتی ہیں مگر ان کے انداز میں تمسخر شامل ہوتا ہے، یہ خطرناک ہے کیونکہ شوہر فوراً بھانپ لیتا ہے۔

سوال:

ایسے موقع پر آپ کمرے سے نکل کیوں نہیں جاتیں؟

جواب:

اگر میں کمرے سے نکل جاؤں تو شوہر کو لگے گا کہ میں اس سے بھاگ رہی ہوں اور اس کی بات سننا ہی نہیں چاہتی۔

  • ایسے وقت میں بس خاموش رہنا چاہیے اور اس کی کسی بات کی مخالفت نہیں کرنی چاہیے جب تک وہ پرسکون نہ ہو جائے۔
  • جب شوہر بول بول کر تھک جاتا ہے تو میں نرمی سے کہتی ہوں: “پوری ہو گئی آپ کی بات؟”
    پھر اپنے معمولات میں مصروف ہو جاتی ہوں۔

Mohabbat bolon se nahi, bartao se zaahir hoti hai.Ek cup chai aur naram lehja, sab se sakht dil ko bhi pighla sakta hai.


سوال:

کیا آپ اس کے بعد بول چال بند کر دیتی ہیں؟

جواب:

نہیں! اس بری عادت سے ہمیشہ بچنا چاہیے۔

  • یہ ایک دو دھاری ہتھیار ہے۔
  • اگر بیوی ہفتوں شوہر سے بات نہ کرے تو وہ اس کیفیت کا عادی ہو جائے گا اور پھر یہ معاملہ بڑھتے بڑھتے نفرت کی شکل اختیار کر لے گا۔

سوال:

پھر آپ کرتی کیا ہیں؟

جواب:

دو تین گھنٹے بعد میں شوہر کے پاس ایک گلاس جوس یا ایک کپ چائے لے کر جاتی ہوں اور محبت بھرے انداز میں کہتی ہوں: پی لیجیے۔

  • حقیقت یہ ہے کہ اسی لمحے شوہر کو سکون اور نرمی کی ضرورت ہوتی ہے۔
  • میں پھر اس سے عام انداز میں بات کرتی ہوں، وہ شرمندہ ہو کر معافی مانگتا ہے اور محبت بھری باتیں کرتا ہے۔

سوال:

اور آپ اس کی باتیں مان لیتی ہیں؟

جواب:

جی بالکل! میں کوئی اناڑی نہیں۔ مجھے اپنے آپ پر پورا بھروسہ ہے۔

  • کیا یہ درست ہوگا کہ شوہر غصے میں ہو تو میں اس کی باتوں کو مان لوں اور جب وہ سکون سے بات کرے تو میں ماننے سے انکار کر دوں؟

سوال:

آپ کی عزتِ نفس (self respect) کہاں جاتی ہے؟

جواب:

میری عزتِ نفس اسی میں ہے کہ میرا شوہر مجھ سے راضی ہو اور ہماری زندگی پُرسکون رہے۔

  • حقیقت یہ ہے کہ شوہر بیوی کے درمیان الگ الگ عزتِ نفس نام کی کوئی چیز نہیں ہوتی۔
  • جب میاں بیوی ایک دوسرے کا لباس ہیں تو پھر الگ الگ انا (ego) کی گنجائش ہی نہیں

پُرسکون زندگی کن چیزوں میں نہیں ہے؟

دولت میں نہیں
بہت سی مالدار عورتیں ہیں لیکن ان کی ازدواجی زندگی ناخوشگوار ہے۔ شوہر اکثر ان سے دور بھاگتا ہے۔

اولاد میں نہیں
بچے ہونے کے باوجود بہت سی عورتیں شوہر کی محبت سے محروم رہتی ہیں، بلکہ بعض اوقات نوبت طلاق تک پہنچ جاتی ہے۔

کھانا پکانے کی مہارت میں نہیں
بہت سی خواتین عمدہ کھانا پکاتی ہیں مگر پھر بھی انہیں شوہر کی بدسلوکی کا سامنا رہتا ہے۔


اصل راز – سمجھداری اور حسنِ اخلاق

1. غصے کے وقت خاموشی

جب شوہر غصے میں ہو تو سب سے اہم چیز ہے عزت کے ساتھ خاموش رہنا۔

  • صرف چپ رہنا کافی نہیں بلکہ اس خاموشی میں احترام شامل ہونا چاہیے۔
  • طنزیہ یا تمسخرانہ خاموشی رشتے کو مزید خراب کر دیتی ہے۔

2. کمرے سے بھاگنا نہیں

غصے کی حالت میں اگر بیوی کمرہ چھوڑ کر نکل جائے تو شوہر کو لگتا ہے کہ وہ اس سے بھاگ رہی ہے۔بہتر یہ ہے کہ وہیں رہ کر خاموشی سے سن لیا جائے جب تک وہ ٹھنڈا نہ ہو جائے۔

3. غصہ ٹھنڈا ہونے کے بعد کا رویہ

جب شوہر بول بول کر تھک جائے تو کچھ دیر اسے سکون کرنے دیا جائے۔

  • پھر بیوی نرمی سے پوچھے: “پوری ہو گئی آپ کی بات؟”
  • اس کے بعد اپنے معمولات میں مشغول ہو جائے۔

4. نارمل برتاؤ اپنانا

کچھ گھنٹے بعد شوہر کے پاس محبت بھرے انداز میں جانا — ایک کپ چائے یا جوس دینا۔

  • اسی وقت نارمل انداز میں بات شروع کرنا اور یہ ظاہر کرنا کہ کوئی ناراضگی نہیں۔
  • اکثر شوہر اپنی سخت کلامی پر شرمندگی ظاہر کرتا ہے اور اچھے انداز میں بات کرنے لگتا ہے۔

5. لمبے عرصے کی ناراضگی سے بچنا

کبھی بھی دنوں تک خاموش رہنے یا بات چیت بند کرنے کی عادت نہ اپنائیں۔

  • یہ طریقہ ایک دو دھاری تلوار ہے۔
  • اگر شوہر اس کا عادی ہو گیا تو رشتہ آہستہ آہستہ نفرت میں بدل سکتا ہے۔

6. اہمیت اور عزت

بیوی کی اصل عزتِ نفس اسی میں ہے کہ شوہر اس سے راضی ہو اور گھر کا ماحول پُرسکون رہے۔

  • اصل عزت تب ہے جب دونوں ایک دوسرے کے لئے سکون کا ذریعہ بنیں۔
  • میاں بیوی جب ایک دوسرے کا لباس ہیں تو پھر الگ الگ انا (ego) کی گنجائش ہی نہیں رہتی۔


रिश्तों की खूबसूरती वक्त देने से बढ़ती है | माफ करना और माफी मांगना रिश्तों को मजबूत बनाता है | मियां-बीवी के रिश्ते में सब्र और शुकर सबसे बड़ा हथियार है | वक्त रहते रिश्तों की कद्र करें, क्योंकि गुज़रा हुआ वक्त वापस नहीं आता |

✦ نتیجہ

اس ستر سالہ خاتون کی باتوں سے یہ حقیقت واضح ہو جاتی ہے کہ خوشحال ازدواجی زندگی کا تعلق نہ دولت سے ہے، نہ اولاد سے اور نہ ہی کھانا پکانے کی مہارت سے۔ اصل راز ہے برداشت، خاموشی میں عزت، محبت بھرا رویہ اور سمجھداری۔ یہی وہ چیزیں ہیں جو ایک عام سے گھر کو جنت میں بدل دیتی ہیں۔غصے کے وقت خاموشی، بعد میں نرمی اور محبت بھرا رویہ — یہی وہ راستہ ہے جو شادی شدہ زندگی کو جنت بنا دیتا ہے۔

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ایک دوسرے کے جذبات اور احساسات کو سمجھیں اسی میں رشتوں کی مضبوطی ہے


✦ اکثر پوچھے جانے والے سوالات (FAQs)

سوال 1: کیا دولت سے ازدواجی زندگی پُرسکون ہو جاتی ہے؟

  • نہیں، بہت سی مالدار عورتوں کی زندگی بھی ناخوش رہتی ہے۔

سوال 2: غصے کے وقت بیوی کو کیا کرنا چاہیے؟

  • خاموش رہنا چاہیے مگر ایسی خاموشی جس میں احترام ہو۔ اس میں عزت اور نرمی ہونی چاہیے۔

سوال 3: کیا دنوں تک بول چال بند رکھنا درست ہے؟

  • نہیں، یہ عادت رشتے میں نفرت پیدا کر دیتی ہے۔

سوال 4: اصل عزتِ نفس کس میں ہے؟

  • اصل عزت اسی میں ہے کہ شوہر راضی ہو اور گھر پُرسکون ہو۔


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